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नाक के दाएं छिद्र को बंद करके बेन क्षेत्र से वायु को धीरे-धीरे बाहर निकाल दे आयु को अंदर खींचते समय बाहर छोड़ते समय गले से खर्राटे की आवाज निकालनी चाहिए इस तरह इस क्रिया को पांच बार करें धीरे-धीरे अभ्यास की संख्या बढ़ते हुए 20 बार तक ले जाएं 

सुरेन्द्र दुबे  9425179527  मीना अग्रवाल

नेचुरोपैथी

उज्जायी प्राणायाम

उज्जायी शब्द का अर्थ होता है विजय या जीतने वाला इस प्राणायाम के अभ्यास से वायु को जीता जाता है इस क्रिया से बहुत रोगों से बचा जा सकता है वशर्ते किसी प्राणायाम और क्रिया को किसी योग्य शिक्षक से सीख कर ही किया जाए

इसका अभ्यास

खड़े होकर लेट कर बैठ कर

पहले विधि

सुखासन में बैठकर मुंह को बंद करके नाक के दोनों छिद्रों से वायु को तब तक अंदर खींचे जब तक वायु फेफड़ों में न भर जाए फिर कुछ देर वायु को अंदर ही रोकना

नाक के दाएं छिद्र को बंद करके बेन क्षेत्र से वायु को धीरे-धीरे बाहर निकाल दे आयु को अंदर खींचते समय बाहर छोड़ते समय गले से खर्राटे की आवाज निकालनी चाहिए इस तरह इस क्रिया को पांच बार करें धीरे-धीरे अभ्यास की संख्या बढ़ते हुए 20 बार तक ले जाएं

दूसरी विधि

कंठ गले को सिकुड़ कर सांस इस प्रकार ले व छोडे की गले में घर्षण हो इसको करने से ऐसी आवाज होगी जैसे कबूतर गुटर गू करते हैं इस दौरान मूल बंद भी लगाए

5 से 10 श्वास इस प्रकार लें और छोड़ें इस प्रकार से श्वास अंदर भरकर जलंधर बंद से श्वास रिथिल करें धीरे-धीरे श्वास छोड़ें ध्यान कांत गले के पीछे रीढ पर रहे

सावधानी

इस प्राणायाम से गले में खुजली हो सकती है बलगम भी निकल सकता है अगर ज्यादा परेशानी लगे फिर छोड़ दें

इसके लाभ

श्वास की नली थायराइड आदि को संतुलित करती है थायराइड में बहुत लाभ मिलता है

उज्जायी क्रिया

क्रिया दो प्रकार से होती है खड़े होकर और लेट कर

पीछे के सहारे जमीन पर लेट जाएं शरीर सीधा रखें हथेलियां को जमीन पर सटाकर रखें पैरों को ढीला रखें सीधा ऊपर देखें स्वाभाविक सांस ले

१-मुंह के द्वारा लगातार तेजी से शरीर की पूरी हवा निकाले हवा निकालने की गति वैसी ही रहनी चाहिए जैसे सीटी बजाने के समय होती है चेहरे पर तनाव न हो होठों के बीच से हवा निकाल दी जाती है

२-आपके दोनों छिद्रों से धीरे-धीरे श्वास खींचना चाहिए शरीर ढीला रखें जितना सुखपूर्वक सांस खींचकर भर सके उसे भर लें

३-हवा को भीतर ही रोके और दोनों पैरों के अंगूठे को सटाकर उन्हें आगे की ओर फैला लें पहले 7 दिन 4 सेकंड करें फिर बढाकर 8 सेकंड ले जाएं इतनी देर हम सांस रोक सके रोके

४-फिर मुंह से उसी प्रकार श्वास निकाले जैसे प्रथम चरण में किया गया था जल्दबाजी न करें श्वास छोड़ते समय मांसपेशियों को ऊपर से नीचे ढीला करें पहले को तब पेट को जांघों पैरों और हाथों को पूरी सांस छोड़ने के बाद पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें 10-15 सेकंड आराम करें

सावधानी

पहले दिन 3 बार

दूसरे दिन 4 बार

तीसरे दिन 5 बार

इसे करें इससे अधिक नहीं इसका अभ्यास साफ स्वच्छ हवा वाले स्थान पर ही करें।

लाभ:-हृदय रोगी (low bp) वाले मरीजों के लिए बहुत उपयुक्त। श्वास रोग और साइनस में लाभदायक, शरीर में ऊर्जा को जागृत करना है अगर आप अपनी सेहत का ध्यान दोगे जीवन में सुख की अनुभूति होगी जो भी बहन भाई मेरा article पढ़ रहे हैं लाभ उठाएं

Health is wealth

मीना अग्रवाल

आगरा

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